सिंदूर क्यों लगाया जाता है? और इसका क्या महत्व है?

भारत के कुछ प्रदेश जैसे बिहार,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल,झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, आसाम,और भी ऐसी जगहें हैं जहाँ सिंदूर लगाना हिन्दू धर्म के हिसाब से अनिवार्य होता है। इन प्रदेशों में शादी के बाद स्त्रियों की माँग में सिंदूर लगाने का प्रचलन है। जबकि बहुत सारे राज्यों में सिंदूर का चलन नहीं है।
जिन प्रदेशों में शादी के बाद सिंदूर लगाने का प्रचलन है वहाँ जब किसी लड़की की शादी होती है को हिन्दू धर्म के अनुसार लड़का पहली बार लड़की की माँग में सिंदूर लगाता है उसके बाद से लड़की हर दिन खुद अपने माँग में सिंदूर लगाती हैं ।
हिन्दू धर्म में स्त्रियों की माँग में सिंदूर लगाना सुहागन होने और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सुहागन के 16 श्रृंगार में एक सिंदूर अखंड सुहागन होने की निशानी होती है। ऐसी मान्यता है कि सिंदूर लगाने से पति की आयु और स्त्री के सौभाग्य में वृद्धि होती है।
धार्मिक महत्व -सिंदूर लगाने की प्रथा का उल्लेख रामायण के समय में मिलता है। माता सीता रोज श्रृंगार के समय सिंदूर लगाती थीं। एक बार हनुमान जी के पूछने पर उन्होंने बताया था कि सिंदूर लगाना पति की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है। उनका सिंदूर लगाना भगवान राम को अच्छा लगता है जिससे उन्हें खुशी मिलती है और मन प्रसन्न रहता है।
लाल रंग शक्ति का प्रतीक- भारतीय पौराणिक कथाओं में लाल रंग के माध्यम से माता पार्वती की उर्जा को व्यक्त किया गया है। हिंदुओं का मानना है कि सिंदूर लगाने से माता पार्वती स्त्रियों को अखंड सुहागन होने का आशीर्वाद देती हैं।
देवी लक्ष्मी के सम्मान का प्रतीक- कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर पाँच स्थानों पर रहती हैं और उन्हें हिन्दू समाज में सिर पर स्थान दिया गया है। अत: सर में सिंदूर लगाना देवी लक्ष्मी के हमारे घर पर बास करने और भाग्य वृद्धि का संकेत है।
शरीर रचना के अनुसार महिलाओं के माँग का स्थान जहाँ सिंदूर लगाया जाता है वह अधिक कोमल और संवेदनशील होता है। सिंदूर में पारा धातु पाया जाता है जो सर को ठंढक देती है ।
शादी के बाद महिलाओं के ऊपर काफी जिम्मेदारी आ जाती है जिससे कभी तनाव भी होने लगता है ।सिंदूर लगाने से सिर दर्द, अनिद्रा, और मस्तिष्क से जुड़े रोग भी दूर होते हैं।
सिंदूर लगाने से महिलाओं की खूबसूरती बढ़ जाती है और उनके चेहरे पर हमेशा एक तेज दिखता है जो उनके रूप को प्रभावशाली बना देता है।
सिंदूर बुरे प्रभावों से बचाता है। माँग में जहाँ सिंदूर भरा जाता है वह स्थान ब्रह्म् रंध्र और अघ्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है । सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से बचाता है।

Comments

comments