मकर संक्रांति पर काले तिल का ये 5 चमत्कारी उपाय ,भर देंगे जीवन में खुशियाँ और सुख समृद्धि

मकर संक्राति का यह पर्व हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व माना जाता हैं। वही यह त्योहार माघ माह में कृष्ण पंचमी को देश के लगभग सभी राज्यों में अलग—अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाया जाता हैं। वह इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता हैं, वही जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता हैं। तो इसे ही मकर संक्रांति माना जाता हैं।वही हिंदू धर्म में सूर्य की पूजा अर्चना को विशेष महत्व दिया जाता हैं और सूर्य देवता के रूप में ही पूजा जाता हैं। वही सूर्य देवता ही पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवित प्राणियों का भरण पोषण करते हैं। इस बार मकर संक्रांति के त्योहार पर एक विशेष योग भी बन रहा हैं। वही इस साल 2019 में मकर संक्रांति सर्वार्थ सिद्धि योग भी मनाया जाएगा। वही सूर्य के मकर राशि में आने से मलमास खत्म हो जायेगा। जिससे मांगलिक कार्य फिर से आरम्भ हो सकते हैं।

मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसमें पुण्य काल के समय किए गए उपायों का शुभ प्रभाव साल भर तक लाभ पंहुचाता है। निरोगी काया, धन-समृद्धि बढ़ाने के लिए, सफलता की चाह रखने वाले मनुष्य को चाहिए वो इन 5 कामों को जरुर करें। शास्त्रों के अनुसार ये 5 कार्य करने वाला व्यक्ति हार का मुंह नहीं देखता है। कार्यों में दिन दूनी और रात चैगुनी तरक्की प्राप्त करता है।

1.शास्त्रों में मकर संक्रांति पर तिल-स्नान का बहुत महत्त्व बतलाया गया है। इस दिन तिल – स्नान करने वाला मनुष्य सात जन्म तक रोगी नहीं होता है। साथ ही हमेशा स्वास्थय लाभ प्राप्त करता है।अच्छे स्वास्थय की कामना करने वालें मनुष्य को चाहिए। कि इस दिन तिल से स्नान करें।

2.तिल का उबटन बना लें। इस उबटन को अपने पूरे शरीर पर लगा ले ऐसा करने से आपका शरीर से सभी गंदगी दूर हो जाएगी साथ ही पूरे साल आपको स्वास्थय लाभ पंहुचाएगा। संक्रांति पर्व पर स्नान के संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि-

रवि संक्रमणे प्रासेन स्नानाद्यस्तु मानवः।
सप्तजन्मनि रोगो स्द्यान्निर्धनश्चैव जायतेः।
अर्थात् सूर्य की संक्रांति के दिन जो मनुष्य स्नान नहीं करता है। वो सात जन्मों तक रोगी रहता है। इसलिए संक्रांति पर स्नान जरुर करें।

3.नहाने के बाद आप सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ा दें। इस बात का ध्यान रखें की उस जल में काले तिल जरूर होने चाहिए। इस उपाय को करने से सूर्य देव की विशेष कृपा मिलती है।

4.मकर संक्रांति पर तिल के व्यंजन खाने की परंपरा है। मकर संक्रांति पपर तिल के लड्डू खाने की परंपरा है। इससे संबंधित रोगों में भी लाभ होता है।

कहा जाता है कि तिल के दान से शनि, राहु, केतु से संबंधित हर तरह के दोष दूर हो जाते हैं. अगर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, तो भी हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. अगर तिल को गुड़ के साथ मिलाकर दान दिया जाए तो सूर्य व मंगल के दोष समाप्त होते हैं. कई जगह बहते जल में तिल-गुड़ बहाया जाता है, ऐसा करने से हर तरह के कष्ट से मुक्ति मिलती है.

5.इस व्रत में तिल के उपयोग का बहुत महत्व है। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस दिन लाल गाय को गुड़ व घास खिलाने का भी महत्व है। गाय को गुड़ व घास खिलाने के पश्चात पानी अवश्य ही पिलाना चाहिए, ऐसा करने से पितृ हम पर प्रसन्न होते हैं तथा जीवन को सुख में बदल देते हैं।

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