कोर्ट की सख्त टिप्पणी पार्टी छोड़ने वाले विधायकों पर ।

बंबई उच्च न्यायालय की पणजी पीठ ने सोमवार को कहा कि विधायक जनता के सेवक होते हैं, न कि जनता के गुलाम. न्यायालय ने यह टिप्पणी सत्तारूढ़ पार्टी के सहयोगी दल महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) की ओर से पिछले माह दाखिल याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें अक्टूबर में भाजपा में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ने वाले दो विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता एमजीपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए न्यायमूर्ति आरएम बोर्डे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चौहान ने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए याचिकाओं का बोझ अदालत पर डालने के लिए राजनीतिक पार्टियों से नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि संविधान में ऐसा कुछ नहीं है, जिसके तहत एक निर्वाचित सदस्य का अपनी सीट से इस्तीफा देने का अधिकार समाप्त कर दिया जाए। इस तरह का अधिकार न देना लोकतंत्र के सिद्धांतों के लिए विध्वंसक हो सकता है। विधायक जनता का एक सेवक है, न कि गुलाम ।

अदालत ने कहा, ‘यह सच है कि लगातार इस्तीफे और उपचुनाव से देश के वित्त पर बोझ पड़ता है, लेकिन इसकी कोई वजह नहीं है कि अपनी सदस्यता जारी रखने की इच्छा नहीं रखने वाले विधायकों को मजबूर किया जाए। ‘ अदालत ने कहा कि एक व्यक्ति निर्वाचित होने के बाद कई कारणों से एक सदस्य के रूप में आगे नहीं बढ़ने का फैसला कर सकता है। एमजीपी ने अपनी याचिकाओं में पूर्व कांग्रेसी विधायक सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोप्ते को अयोग्य ठहराने की मांग की थी ।

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