आखिर क्या है साईं बाबा के चांद मिया होने का सच ?

वर्तमान में साईं बाबा के विरोधी उन्हें चांद मिया मानते हैं। साईं विरोधियों अनुसार वे एक मुस्लिम थे और हिन्दुओं को किसी मुस्लिम की पूजा नहीं करनी चाहिए। आओ जानते हैं कि आखिर यह चांद मिया कौन थे?

महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी गांव में सांईं बाबा का जन्म हुआ था। सांईं के पिता का नाम गोविंद भाऊ और माता का नाम देवकी अम्मा है। कुछ लोग उनके पिता का नाम गंगाभाऊ बताते हैं और माता का नाम देवगिरि अम्मा।

दे‍वगिरि के पांच पुत्र थे। पहला पुत्र रघुपत भुसारी, दूसरा दादा भुसारी, तीसरा हरिबाबू भुसारी, चौथा अम्बादास भुसारी और पांचवें बालवंत भुसारी थे। सांईं बाबा गंगाभाऊ और देवकी के तीसरे नंबर के पुत्र थे। उनका नाम था हरिबाबू भुसारी।

साईं बाबा के माता-पिता के घर के पास ही एक मुस्लिम परिवार रहता था। उस परिवार के मुखिया का नाम चांद मिया था और उनकी पत्नी चांद बी थी। उन्हें कोई संतान नहीं थी। हरिबाबू अर्थात साईं उनके ही घर में अपना ज्यादा समय व्यतीत करते थे। चांद बी हरिबाबू को पुत्रवत ही मानती थीं।

इसके अलावा साईं बाबा के जीवन में एक चांद पाशा पाटिल का नाम भी आता है जो कि धूपखेड़ा के मुस्लिम जागीरदार थे। उन्हीं का घोड़ा गुम हो गया था तो साईं बाबा ने आवाज लगाकर उसे बुला लिया था। शिरडी आने के पहले साईं बाबा धूपखेड़ा इन्हीं चांद पाशा पाटिल के यहां पर ठहरे थे। वहीं से वे एक बारात में दूसरी बार शिरडी आए थे और फिर वहीं बस गए।

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