जिस पेड़ के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान मिला उसको नष्ट करने की हो चुकी है तीन बार साजिश

सारनाथ में स्थित प्रसिद्ध बोधि वृक्ष का बहुत ही महत्व है । प्रतिदिन इस बोधि वृक्ष के दर्शन के लिए काफी लोग आते हैं । इसी बोधि वृक्ष के नीचे महात्मा गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। लेकिन क्या आपको पता है या बोधिवृक्ष को तीन बार नष्ट करने की कोशिश की गई है आइए हम आपको बताते हैं कि कब कब इसको नष्ट करने की कोशिश की गई । आज जो बृक्ष सारनाथ में मौजूद है या चौथी पीढ़ी का वृक्ष है ।

पहली कोशिश : कहा जाता है कि बोधि वृक्ष को पहली बार सम्राट अशोक की एक वैश्य रानी तिष्यरक्षिता ने चोरी छुपे कटवा दिया था रानी ने या काम उस समय किया जब सम्राट अशोक दूसरे प्रदेशों की यात्रा पर गए हुए थे परंतु लाने का प्रयास विफल रहा तथा यह वृक्ष दुबारा जड़ से एक नया वृक्ष उगाया तथा यह वृक्ष 800 सालों तक रहा या दूसरी पीढ़ी का अध्यक्ष माना गया ।

दूसरी कोशिश : इस बार इस पेड़ को बंगाल के राजा शशांक ने बोधि वृक्ष के जड़ से उखाड़ने की कोशिश की लेकिन मैं इस में असफल रहे तब राजा ने इस पेड़ को कटवा दिया और इसकी जड़ों में आग लगाकर इसे नष्ट करना चाहा परंतु तब दिया तब भी वह विफल रहे और एक बार पुनः बोधिवृक्ष की जड़ों से एक नया पेड़ उग गया और वह 1250 सालों तक रहा ।

तीसरी कोशिश : तीसरी बार 1876 में प्राकृतिक आपदा की वजह से या पेड़ नष्ट हो गया । तब लार्ड कनिघम ने श्रीलंका के अनुराधा पुरम से बोधिवृक्ष की शाखाएं मंगवाकर उन्हें बोधगया में स्थापित करवाया और यह वृक्ष तब से लेकर अब तक है या चौथी पीढ़ी का वृक्ष है ।

Comments

comments