सिर्फ एक एफ आई आर से Shahi Imam Barkati औकात में आ गए – ब्रिटिश सरकार ने इजाजत दी थी इनको

Shahi Imam Barkatiकेंद्र सरकार ने वीआईपी कल्चर को खत्म करते हुए लाल बत्ती लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। यह प्रतिबंध 1 मई से लागू हो गया। सरकार के आदेश के तहत यह बैन केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य के कैबिनेट मंत्रियों. ब्यूरोक्रेट और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के जज पर भी लागू था। टीपू सुल्तान मस्जिद के Shahi Imam Barkati ने केंद्र सरकार के आदेश को मानने से इनकार करते हुए कहा था कि वह लाल बत्ती लगाना जारी रखेंगे।

लाल बत्ती लगाने की इजाजत ब्रिटिश सरकार के समय से मिली हुई है। उन्होंने कहा, “मैं लाल बत्ती उस समय हटाऊंगा जब सब लोग बत्ती हटा देंगे। मैं लाल बत्ती लगाना जारी रखूंगा क्योंकि ब्रिटिश सरकार की ओर से मुझे इजाजत मिली हुई है।” टीपू मस्जिद Shahi Imam Barkati हो या बाबरी का हराम के टुकडों पर पलता है और सरकार को आँख दिखाता है। सिर्फ और सिर्फ एफ़ आई आर दर्ज होने से ही सारी इमामीयत धरी की धरी रह गयी। इनके बड़बोले पन पर कोई एक्शन नहीं लेता इस लिए एक से बढ़ के एक बयान देते है।

Shahi Imam Barkati को समझना चाहिए की ये भारत सरकार है, ब्रिटिश सरकार नही, और आपको लाल बत्ती लगाने की ज़रूरत ही क्या है? आप एक इमाम हैं, इमामत के काम को अंजाम दीजिये, सादगी अपनाइए। मौलाना बरकती , दिग्विजय, आजमखान जैसे नेता सोचते हैं कि उनकी इस सस्ती बयानबाजी से मुसलमान उन्हें अपना रहनुमा समझने लगेंगे लेकिन पाकिस्तानी स्लीपर सेल्स के अलावा कोई उनके झांसे में नहीं आने वाला।

इज़्ज़त रास नहीं आई इमाम साहब को, चलिए खैर बेइज़्ज़त होकर ही सही कम से कम कहना तो माना, ऐसे गैरजिम्मेदार लोग ही अपने रसूख का फायदा उठाने के लिए कुछ भी करते हैं l इनके पीछे नमाज़ नहीं पढ़नी चाहिए l अनाप -शनाप बोलने , देशद्रोह के लिये उकसाने व साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मामले पर इस इमाम पर जल्दी केस दर्ज किया जाना चाहिए।

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